यदि सब कुछ पहले से लिखा है (तकदीर), तो इंसान को उसके पापों की सजा क्यों? (If everything is already predestined (written as fate), then why should a person be punished for their sins?”)
क्या हम केवल ईश्वर के हाथों की कठपुतलियाँ हैं? एक आम तर्क यह दिया जाता है कि यदि हमारी किस्मत (तकदीर) पहले से लिखी जा चुकी है, तो हमारे पापों के लिए हमें दोषी ठहराना अन्याय है। लेकिन क्या ‘लिखे होने’ का अर्थ ‘मजबूर होना’ है।