विरासत में महिलाओं का हिस्सा पुरुषों से आधा क्यों है? क्या यह न्यायपूर्ण है?

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कुरान का विरासत कानून केवल एक ‘प्रतिशत’ नहीं है, बल्कि यह ‘वित्तीय जिम्मेदारी’ (Financial Responsibility) के साथ जुड़ा हुआ है।

​कुरानी संदर्भ: सूरह अन-निसा(4:11)

​विरासत का मुख्य नियम यहाँ दिया गया है:

​”अल्लाह तुम्हें तुम्हारी औलाद के बारे में वसीयत(आदेश) करता है; एक मर्द(पुरुष) का हिस्सा दो औरतों(महिलाओं) के बराबर है…” (4:11)

​क्या यह न्यायपूर्ण है? (तार्किक और गणितीय विश्लेषण)

​ऊपर से देखने पर यह ‘आधा’ लगता है, लेकिन जब हम कुरान के ‘Total Economic Package’ को देखते हैं, तो गणित पूरी तरह बदल जाता है:

  • जिम्मेदारी का बोझ(The Burden of Responsibility): इस्लाम में पुरुष पर परिवार की पूरी वित्तीय जिम्मेदारी (Financial Obligation) है। उसे अपनी पत्नी (मेहर और रखरखाव), बच्चों, अविवाहित बहनों और बूढ़े माता-पिता का खर्च उठाना पड़ता है। महिला पर अपनी बुनियादी ज़रूरतों के लिए भी एक रुपया खर्च करने की कानूनी जिम्मेदारी नहीं है।
  • शुद्ध बचत(Net Saving): * पुरुष को 2 हिस्से मिलते हैं, लेकिन उसे उसे समाज और परिवार पर ‘खर्च’ (Spend) करना पड़ता है। महिला को 1 हिस्सा मिलता है, और वह पूरा का पूरा उसकी ‘निजी बचत’ (Personal Saving) होती है। उसे इसमें से किसी पर खर्च करने की ज़रूरत नहीं है।

​’The Mathematics of Inheritance’

​Logically यदि हम ‘दो और एक’ के अनुपात को हटा दें, तो समाज का आर्थिक संतुलन बिगड़ जाएगा:

  1. पूंजी का संचय(Capital Accumulation): पुरुष को अधिक हिस्सा इसलिए दिया गया है क्योंकि उसे व्यापार और परिवार चलाने के लिए ‘Capital’ (पूंजी) की आवश्यकता होती है। यदि महिला (जिस पर कोई जिम्मेदारी नहीं है) को बराबर हिस्सा दिया जाए, तो पुरुष अपनी सामाजिक जिम्मेदारियों (जैसे 2:280 और 9:60 के तहत दूसरों की मदद करना) को पूरा नहीं कर पाएगा।
  2. सुरक्षा चक्र: महिला को मिलने वाला १ हिस्सा उसका ‘बोनस’ है। उसे शादी के समय ‘मेहर’ मिलता है, पिता से विरासत मिलती है, और पति की मृत्यु पर भी हिस्सा मिलता है। यह सब मिलकर उसे आर्थिक रूप से पुरुष से अधिक सुरक्षित बना देता है।

​क्या इसे न्याय संगत(Justified) ठहराया जा सकताहै?

​हाँ, इसे कुरान की अन्य आयतों के साथ जोड़कर पूरी तरह न्यायसंगत ठहराया जा सकता है:

  • सूरह अन-निसा(4:34): “पुरुष महिलाओं के संरक्षक(Maintainers) हैं, क्योंकि अल्लाह ने उन में से एक को दूसरे पर (शारीरिक/वित्तीय जिम्मेदारीमें) बढ़त दी हैऔर इसलिए कि वे अपने माल(Wealth) खर्च करते हैं।”

​Conclusion🙁निष्कर्ष): विरासत का यह कानून “In favor of Humanity” है। यदि हम इसे बदल दें, तो पुरुष अपनी वित्तीय जिम्मेदारियों से भागने लगेंगे और समाज का पारिवारिक ढांचा ढह जाएगा। यह ‘गणित’ यह सुनिश्चित करता है कि पैसा वहां अधिक रहे जहाँ ‘खर्च’ की जिम्मेदारी अधिक है।

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