अल्लाह ने अपनी किताब सिर्फ अरबी भाषा में ही क्यों उतारा? Why was Allah’s message only in Arabic?

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ईश्वर ने इंसान को उसकी भाषा में इसलिए पुकारा ताकि वह ‘अक्ल’ लगा सके, न कि इसलिए कि उसे किसी खास भाषा का मोह था। अगर पैगंबर आज के भारत में आते, तो संदेश निश्चित रूप से आपकी और हमारी भाषा में होता।

हर समुदाय के लिए उनकी अपनी भाषा में संदेश

​कुरान इस गलतफहमी को दूर करता है कि अल्लाह का संदेश केवल अरबी में ही आया है। कुरान स्पष्ट रूप से कहता है कि इतिहास में हर कौम के पास एक संदेशवाहक (Messenger) उनकी अपनी मातृभाषा में भेजा गया था।

​”और हमने हर रसूल (संदेशवाहक) को उसकी अपनी कौम की भाषा के साथ ही भेजा, ताकि वह उन्हें स्पष्ट रूप से समझा सके।” (कुरान – सूरह इब्राहीम 14:4)

​तर्क: तोराह (इब्रानी), इंजील (अरामी) और अन्य पुस्तकें अलग-अलग भाषाओं में आई थीं। कुरान अरबी में इसलिए आया क्योंकि पैगंबर मुहम्मद (स.) अरब में पैदा हुए थे और वहां के लोग अरबी बोलते थे।

अरब के लोगों को समझाने के लिए

​अगर कुरान किसी ऐसी भाषा में आता जिसे वहां के लोग नहीं समझते, तो वे इसे मानने से इनकार कर देते। कुरान खुद इस तर्क को पेश करता है:

​”बेशक, हमने इसे एक अरबी कुरान के रूप में उतारा है ताकि तुम समझ सको।” (कुरान 12:2)

“और यदि हम इसे एक गैर-अरबी (विदेशी) भाषा का कुरान बनाते, तो वे (अरब के लोग) कहते: ‘इसकी आयतें हमारी भाषा में स्पष्ट क्यों नहीं की गईं? क्या संदेश गैर-अरबी है और रसूल अरबी?'” (कुरान – सूरह फुस्सीलत 41:44)

अरबी भाषा की विशेषता

​तार्किक रूप से, अरबी एक बहुत ही “Rich” और “Precise” भाषा मानी जाती है। इसमें एक ही शब्द के कई गहरे अर्थ निकलते हैं, जो ईश्वरीय दर्शन और कानूनी बारीकियों को समझाने के लिए बहुत प्रभावी है।

वैश्विक पहुंच के लिए एक ‘Standard’ भाषा

​यदि ईश्वर हर साल हर नई भाषा के लिए मूल ग्रंथ (Original Text) बदलता, तो समय के साथ अर्थ बदल जाते (जैसा कि पिछली पुस्तकों के साथ हुआ)।

  • ​कुरान को एक स्थिर (Standard) भाषा में सुरक्षित रखा गया ताकि दुनिया के किसी भी कोने का व्यक्ति अरबी सीखकर सीधे ईश्वर के शब्दों को मूल रूप में समझ सके।
  • ​अनुवाद (Translations) आज दुनिया की हर भाषा में उपलब्ध हैं, ताकि कोई भी अपनी भाषा में इसका अर्थ समझ सके।

निष्कर्ष:

  • ​ईश्वर का मिशन वैश्विक है, लेकिन शुरुआत स्थानीय (Local) थी: किसी भी वैश्विक क्रांति की शुरुआत एक स्थानीय भाषा से ही होती है।
  • ​सुरक्षा के लिए एक ‘Master Copy’: जैसे पेरिस में ‘Standard Meter’ की छड़ रखी है ताकि पूरी दुनिया में मीटर की लंबाई न बदले, वैसे ही कुरान को अरबी में ‘सुरक्षित’ रखा गया ताकि अनुवादों (Translations) के दौरान होने वाली गलतियों को मूल शब्द से सुधारा जा सके।
  • ​अनुवाद का खुला रास्ता: कुरान का अरबी में होना किसी गैर-अरब को इसे समझने से नहीं रोकता। आज ‘Believer’ वह है जो अपनी भाषा में इसके ‘तर्क’ (Logic) को समझता है, न कि वह जो सिर्फ बिना समझे अरबी दोहराता है।

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