
Exploring the messages of CREATOR
The Allah of Muslims is the same as the Ishwar of Hindus and the God of Christians
Believer vs Non-Believer में आपका स्वागत है
Creator के संदेशों की logical और scientific खोज को समर्पित इस मंच पर आपका स्वागत है। Believer vs Non-Believer पर, हम Comparative Religion का गहराई से अध्ययन करते हैं और faith और modern science के बीच के अंतर को पाटते हैं। क्या कुरान के ‘अल्लाह’, वेदों के ‘ईश्वर’ और बाइबिल के ‘गॉड’ एक ही हैं? हमारे Research based Articles पैगंबरों की अखंड श्रृंखला और धर्मग्रंथों में छुपे Universal Truth को उजागर करते हैं।
चाहे आप विज्ञान और कुरान (Quran and Science) के अद्भुत तालमेल को समझना चाहते हों, मृत्यु के बाद जीवन के तार्किक प्रमाण ढूँढ रहे हों, या इस्लामी सामाजिक कानूनों के पीछे के न्याय और समाजशास्त्र को जानना चाहते हों—यह वेबसाइट आपके लिए है। हम हर धर्म के अनुयायियों और नास्तिकों (Atheists) को आमंत्रित करते हैं कि वे खुले दिमाग से Truth, Tolerance और Logical Dialogue की इस यात्रा में शामिल हों।
ब्रह्मांड की उत्पत्ति: महाविस्फोट और प्रारंभिक धुआं (Origin of Universe in Quran: The Big Bang & The Primordial Smoke)
January 27, 2026
100 साल पहले तक वैज्ञानिक मानते थे कि ब्रह्मांड “स्थिर” (Static) है—यानी यह हमेशा से ऐसा ही था और हमेशा रहेगा। और 20वीं सदी में Science ने Big Bang Theory दिया जबकि 1400 साल पहले, जब कोई Telescope नहीं था, कुरान ने बताया कि Universe की शुरुआत कैसे हुई।
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आसमान: एक सुरक्षित छत (The Sky: A Protective Ceiling)
January 27, 2026
क्या आप जानते हैं कि आसमान हमें अंतरिक्ष के घातक हमलों से कैसे बचाता है? सूरह अल-अंबिया (21:32) और आधुनिक विज्ञान के ज़रिए ‘सुरक्षित छत’ (Protected Ceiling) का वैज्ञानिक विश्लेषण यहाँ पढ़ें
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ब्रह्मांड का अंत: महा-संकुचन और लिपटे हुएपन्ने (The End of Universe: The Big Crunch & The Folding of the Scroll)
January 27, 2026
क्या ब्रह्मांड वापस एक बिंदु पर सिमट जाएगा? वैज्ञानिक सिद्धांत ‘The Big Crunch’ और कुरान (21:104, 81:1-2) में वर्णित ‘आसमान को लपेटने’ और ‘सितारों के टूटने’ के बीच के अद्भुत वैज्ञानिक मेल का विश्लेषण। जानिए कैसे आधुनिक विज्ञान 1400 साल पुरानी आयतों की पुष्टि करता है।”
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सूरज और चाँद की रोशनी: चिराग और आईना (Sun & Moon: The Lamp and The Reflector)
January 27, 2026
क्या सूरज की अपनी रोशनी है और चाँद केवल एक आईना है? सूरह नूह (71:16), यूनुस (10:5) और अल-फुरकान (25:61) के वैज्ञानिक विश्लेषण से समझें कि कैसे कुरान ने 1400 साल पहले ही ‘सिराज/दिया’ (जलता हुआ चिराग) और ‘नूर’ (परावर्तित रोशनी) के बीच का अंतर स्पष्ट कर दिया था।
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समय की रचना और समय का गणित: सूरज, चाँद और कैलेंडर (Creation of Time & Mathematics of Time: Solar & Lunar Calendars)
January 27, 2026
समय (Time) की रचना कैसे हुई और इसका गणित क्या है? सूरह यूनुस (10:5) और अल-इसरा (17:12) के वैज्ञानिक विश्लेषण से समझें कि कुरान ने सूरज और चाँद की गति को वर्षों की सटीक गणना (Calculation of Years) और कैलेंडर का आधार कैसे बताया है।
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पहाड़: धरती की कीलें (Mountains: The Geological Pegs & Roots)
January 27, 2026
क्या पहाड़ सिर्फ ज़मीन के ऊपर हैं? सूरह अन-नबा (78:6-7) और अन-नहल (16:15) से समझें कि कैसे कुरान ने 1400 साल पहले पहाड़ों की ‘गहरी जड़ों’ (Geological Pegs) और पृथ्वी को स्थिर रखने (Isostasy) के वैज्ञानिक रहस्य को उजागर किया था।
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जल: जीवन का स्रोत और आधार (Water: The Origin and Composition of Life)
January 27, 2026
क्या जीवन की शुरुआत पानी से हुई थी? सूरह अल-अंबिया (21:30) और अन-नूर (24:45) के विश्लेषण से जानें कि कैसे कुरान ने 1400 साल पहले ही हर जीवित चीज़ के पानी से बने होने का रहस्य उजागर कर दिया था।
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सूरज और चाँद की गति: एक ब्रह्मांडीय तैराकी (Motion of Sun & Moon: A Cosmic Swim)
January 27, 2026
Motion of Sun & Moon:- सदियों तक इंसान (और शुरुआती विज्ञान भी) मानता रहा कि पृथ्वी स्थिर है और सूर्य उसका चक्कर लगा रहा है (Geocentric Model)। बाद में कोपरनिकस (16वीं सदी) ने कहा कि सूर्य स्थिर है और पृथ्वी चक्कर लगा रही है (Heliocentric Model)। लेकिन 20वीं सदी में हमें पता चला कि सूर्य
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पृथ्वी का आकार और सूरज की मौत (Shape of Earth & The Death of the Sun)
January 27, 2026
ब्रह्मांड विज्ञान में दो और बड़े भ्रम थे: Quranic Verses on Shape of Earth & The Death of the Sun:- Surah Luqman (31:29) & Surah Fatir (35:13) أَلَمْ تَرَ أَنَّ اللَّهَ يُولِجُ اللَّيْلَ فِي النَّهَارِ وَيُولِجُ النَّهَارَ فِي اللَّيْلِ وَسَخَّرَ الشَّمْسَ وَالْقَمَرَ كُلٌّ يَجْرِي إِلَىٰ أَجَلٍ مُّسَمًّى… Surah Al-Furqan (25:62) وَهُوَ الَّذِي جَعَلَ اللَّيْلَ
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