Mountains:- सदियों तक इंसान को लगता था कि पहाड़ केवल पत्थर के बड़े ढेर हैं जो ज़मीन के ऊपर रखे हुए हैं। लेकिन 19वीं सदी के मध्य में (1855 के आसपास), भूवैज्ञानिकों (जैसे Sir George Airy) ने पाया कि पहाड़ों की संरचना “बर्फ के पहाड़” (Iceberg) जैसी होती है। जितना हिस्सा हमें ऊपर दिखता है, उससे कई गुना बड़ा हिस्सा ज़मीन के नीचे (Mantle में) धंसा होता है। इसे “Mountain Roots” कहते हैं।
Quranic Verses on Mountains:-
Surah An-Naba (78:6-7)
. أَلَمْ نَجْعَلِ الْأَرْضَ مِهَادًا. وَالْجِبَالَ أَوْتَادًا
Surah An-Nahl (16:15)
وَأَلْقَىٰ فِي الْأَرْضِ رَوَاسِيَ أَن تَمِيدَ بِكُمْ…
English Translation of verses on Mountains:-
(78:6-7): “Have We not made the earth a resting place? And the mountains as pegs (stakes)?“
(16:15): “And He has placed into the earth firm mountains, lest it should shake with you…”
Hindi Translation of verses on Mountains:-
(78:6-7): “क्या हमने ज़मीन को बिछौना नहीं बनाया? और पहाड़ों को मेखें/कीलें(Pegs) नहीं बनाया?”
(16:15): “और उसने ज़मीन में पहाड़ गाड़ दिए ताकि वह तुम्हें लेकर हिलने/डगमगाने(Shake) न लगे…”
Human Thoughts on Mountains:-
- Surface View: 19वीं सदी तक लोग सोचते थे कि पहाड़ सिर्फ ज़मीन के ऊपर रखे हुए “पत्थर के ढेर” हैं। जैसे टेबल पर रखी किताब।
- Roots Mystery: लोगों को यह नहीं पता था कि पहाड़ ज़मीन के अंदर भी होते हैं।
- Earthquakes: लोगों को लगता था कि पहाड़ धरती का वजन बढ़ाते हैं, यह नहीं पता था कि वे धरती को हिलने (Earthquake) से रोकने में मदद करते हैं (Stabilizers).
Explanation of Quranic Revolution on Mountains:-
कुरान यहाँ पहाड़ों के आकार (Shape) और उनके काम (Function) दोनों का सटीक वर्णन करता है।
A. Mountains as Pegs (औताद – Pegs/Stakes):
कुरान पहाड़ों के लिए “औताद“ शब्द इस्तेमाल करता है।
- Meaning: “औताद” का मतलब होता है तंबू (Tent) की कीलें। कील का छोटा हिस्सा ज़मीन के ऊपर होता है और बड़ा हिस्सा ज़मीन के नीचे गड़ा होता है ताकि तंबू न उखड़े।
- Scientific Fact (Isostasy): जियोलॉजी (Geology) में Isostasy का सिद्धांत बताता है कि पहाड़ों की जड़ें (Mountain Roots) होती हैं।
- जैसे बर्फ का टुकड़ा (Iceberg) पानी में तैरता है (10% ऊपर, 90% नीचे), वैसे ही पहाड़ धरती की परत (Crust) में गहराई तक धंसे होते हैं।
- मिसाल के तौर पर, माउंट एवरेस्ट अगर 9 किमी ऊंचा है, तो उसकी जड़ ज़मीन के अंदर लगभग 125 किमी गहरी हो सकती है। कुरान का शब्द “कील” (Peg) इस संरचना का सबसे बेहतरीन वर्णन है।
B. Preventing Shaking (स्थिरता – 16:15):
कुरान कहता है: “ताकि वह तुम्हें लेकर डगमगाए नहीं।“
- Scientific Fact (Plate Tectonics): पृथ्वी की ऊपरी परत (Crust) कई प्लेटों (Tectonic Plates) में टूटी हुई है जो तैर रही हैं।
- जब ये प्लेटें टकराती हैं, तो पहाड़ बनते हैं। ये पहाड़ उन प्लेटों को “लॉक” (Lock) कर देते हैं और उन्हें ज्यादा हिलने से रोकते हैं। वे धरती के संतुलन (Balance) के लिए “Stabilizers” का काम करते हैं।
Comparative Analysis of Mountains in Religious Books:-
Religious Book / धर्म ग्रंथ | Reference / Verse | Concept / Belief | Why Quran is More Clear? (कुरान अलग और स्पष्ट क्यों है?) |
Al-Quran (Islam) | 78:7, 16:15 | Mountains are Pegs (Roots); they prevent shaking. | Geological Anatomy: कुरान पहाड़ों के सिर्फ बाहरी रूप की बात नहीं करता, बल्कि उनकी “अंदरूनी संरचना” (Deep Roots/Pegs) और उनके “फंक्शन” (Stabilization) की बात करता है, जो मॉडर्न जियोफिजिक्स है। |
Bible (Old Testament) | Bible (Old Testament) | “He set the earth on its foundations; it can never be moved.” | Metaphorical: बाइबिल में पृथ्वी की “नींव” (Foundations) और “खंभों” (Pillars) की बात है। यह काव्यात्मक है। कुरान का शब्द “औताद” (Pegs) एक विशिष्ट “आकार” (Shape) बताता है जो विज्ञान से मेल खाता है। |
Rigveda (Hinduism) | Mandala 2, Hymn 12 | Indra cut off the wings of mountains to make them stable. | Mythological: वेदों में कथा है कि पहले पहाड़ों के पंख होते थे और वे उड़ते थे, फिर इंद्र ने पंख काटकर उन्हें स्थिर किया। कुरान में ऐसी कोई पौराणिक कथा (Myth) नहीं है, सिर्फ भू-विज्ञान (Geology) है। |
Conclusion of Mountains:-
कुरान की आयत 78:7 ने 1400 साल पहले वह नक्शा खींच दिया था जिसे 19वीं सदी में सर जॉर्ज एयरी (Sir George Airy) ने Theory of Isostasy के जरिए साबित किया। पहाड़ सिर्फ पत्थर के ढेर नहीं, बल्कि धरती को थामने वाली कीलें हैं।