यदि विज्ञान कहता है कि पृथ्वी अरबों साल पुरानी है, तो धार्मिक ग्रंथों में इसे दिनों में क्यों गिना गया है?

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कुरान यह स्पष्ट करता है कि जिसे हम ‘दिन’ समझते हैं, वह सृष्टि के हर कोने में एक समान नहीं है। यहाँ इसका तार्किक और वैज्ञानिक विश्लेषण दिया गया है:

​’दिन’ (Yawm) का भाषाई और वैज्ञानिक अर्थ

​अरबी भाषा में ‘यौम’ (Day) का अर्थ केवल 24 घंटे नहीं होता, बल्कि इसका अर्थ एक ‘लंबा काल खंड’ (Period/Epoch/Age) भी होता है।

  • खगोलीय तथ्य: पृथ्वी पर एक ‘दिन’ 24 घंटे का है क्योंकि यह अपनी धुरी पर इतनी देर में घूमती है। लेकिन शुक्र (Venus) पर एक दिन पृथ्वी के 243 दिनों के बराबर होता है। अतः, ‘दिन’ की परिभाषा उस खगोलीय पिंड (Celestial Body) की गति पर निर्भर करती है।
  • सृष्टि की रचना: जब कुरान कहता है कि आकाश और पृथ्वी “6 दिनों” में बने, तो इसका अर्थ 24 घंटे वाले दिन नहीं, बल्कि रचना के 6 बड़े कालखंड (6 Epochs) हैं।

​समय की सापेक्षता(Relativity of Time) और कुरान

​विज्ञान (अल्बर्ट आइंस्टीन) ने 20वीं सदी में बताया कि समय ‘स्थिर’ नहीं है, बल्कि यह गुरुत्वाकर्षण और गति के साथ बदलता है। कुरान ने इसे 1400 साल पहले ही स्पष्ट कर दिया था:

हजार साल का एक दिन(सूरह अल-हज22:47):

“…और बेशक आपके रब के यहाँ एक दिन तुम्हारे (पृथ्वी के) हजार साल के बराबर है।”

व्याख्या: यह आयत बताती है कि ब्रह्मांड के अलग-अलग हिस्सों में समय की गति अलग है। पृथ्वी के 1000 साल सृष्टिकर्ता के एक ‘दिन’ के बराबर हो सकते हैं।

पचास हजार साल का एक दिन (सूरह अल-मआरिज 70:4):

“फरिश्ते और रूह (Spirit) उसकी ओर चढ़ते हैं एक ऐसे दिन में जिसकी माप पचास हजार साल है।”

व्याख्या: यहाँ समय का विस्तार और भी बड़ा दिखाया गया है। यह स्पष्ट करता है कि ‘दिन’ केवल एक मानक (Measurement) है जो संदर्भ के साथ बदलता रहता है।

‘द एरेफ’ और सृष्टि का संतुलन (सूरह अल-आराफ़ 7:54)

“बेशक तुम्हारा रब अल्लाह है, जिसने आकाशों और पृथ्वी को छह दिनों (काल खंडों) में पैदा किया, फिर वह अर्श (सिंहासन) पर सुशोभित हुआ…”

वैज्ञानिक तर्क: विज्ञान कहता है कि ब्रह्मांड ‘बिग बैंग’ के बाद कई चरणों (Stages) से गुजरा—जैसे परमाणु का बनना, तारों का जन्म, ग्रहों का निर्माण आदि। कुरान के “6 दिन” इन्हीं 6 वैज्ञानिक चरणों (Stages of Evolution) की ओर संकेत करते हैं।

समय का गणित (The Mathematics of Time)

यदि हम अरबों वर्षों को सृष्टिकर्ता के ‘दिन’ के पैमाने से मापें, तो विज्ञान और कुरान में कोई विरोध नहीं रह जाता:

  1. Time Dilation: सामान्य सापेक्षता (General Relativity) के अनुसार, गुरुत्वाकर्षण समय के प्रवाह को प्रभावित करता है। गुरुत्वाकर्षण क्षेत्र (Gravity Field) जितना मज़बूत होगा, समय उतना ही धीमा चलेगा। पृथ्वी के केंद्र के पास समय, माउंट एवरेस्ट की चोटी की तुलना में सूक्ष्म रूप से धीमा चलता है। विशाल पिंडों (जैसे ब्लैक होल) के पास समय लगभग रुक सा जाता है। गुरुत्वाकर्षण जितना अधिक होगा, समय उतना धीमा चलेगा। ब्रह्मांड की रचना के समय ऊर्जा और गुरुत्वाकर्षण चरम पर था, इसलिए वहां का एक ‘क्षण’ पृथ्वी के लाखों वर्षों के बराबर हो सकता है।
  2. दृष्टिकोण का अंतर: पृथ्वी 4.5 अरब साल पुरानी है—यह ‘मानव-निर्मित’ समय (Human Scale) है। सृष्टिकर्ता के पैमाने पर यह केवल कुछ ‘दिनों’ का काम हो सकता है।

निष्कर्ष( Conclusion):
 यह कहना कि कुरान विज्ञान के विरुद्ध है, केवल ‘दिन’ शब्द की गलत व्याख्या है। कुरान स्वयं समय के लचीलेपन (Flexibility of Time) की गवाही देता है। The Law of Time साबित करता है कि सृष्टिकर्ता का मार्गदर्शन अत्यंत वैज्ञानिक और मानवता के पक्ष में है, क्योंकि यह हमें संकीर्ण सोच से निकाल कर ब्रह्मांडीय सत्य (Universal Truth) की ओर ले जाता है।

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